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mahabharat 1.70.19: नाना प्रकार के वृक्षों से युक्त उस वन में अनेक स्थानों पर अग्निहोत्र की अग्नि प्रज्वलित हो रही थी। इस प्रकार उस अद्वितीय आश्रम के प्रति महाबली राजा दुष्यंत के हृदय में बड़ी श्रद्धा थी॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.70.19 
नानावृक्षसमाकीर्णं सम्प्रज्वलितपावकम्।
तं तदाप्रतिमं श्रीमानाश्रमं प्रत्यपूजयत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार के वृक्षों से युक्त उस वन में अनेक स्थानों पर अग्निहोत्र की अग्नि प्रज्वलित हो रही थी। इस प्रकार उस अद्वितीय आश्रम के प्रति महाबली राजा दुष्यंत के हृदय में बड़ी श्रद्धा थी॥19॥
 
In that forest, which was full of various kinds of trees, the fire of Agnihotra was burning at many places. In this way, the great King Dushyant had great respect for that unique hermitage in his heart.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)