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mahabharat 1.70.18: राजा अभी भी वन की शोभा निहार रहे थे कि उनकी दृष्टि एक सुन्दर आश्रम पर पड़ी, जो अत्यंत सुन्दर और मनमोहक था। वहाँ बहुत से पक्षी हर्ष और प्रसन्नता से कलरव कर रहे थे॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.70.18 
प्रेक्षमाणो वनं तत् तु सुप्रहृष्टविहङ्गमम्।
आश्रमप्रवरं रम्यं ददर्श च मनोरमम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजा अभी भी वन की शोभा निहार रहे थे कि उनकी दृष्टि एक सुन्दर आश्रम पर पड़ी, जो अत्यंत सुन्दर और मनमोहक था। वहाँ बहुत से पक्षी हर्ष और प्रसन्नता से कलरव कर रहे थे॥18॥
 
While the king was still admiring the beauty of the forest, his eyes fell on a beautiful hermitage, which was extremely beautiful and charming. Many birds were chirping there in joy and happiness.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)