श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.70.17 
एवंगुणसमायुक्तं ददर्श स वनं नृप:।
नदीकच्छोद्भवं कान्तमुच्छ्रितध्वजसंनिभम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वह वन मालिनी नदी के तट पर फैला हुआ था और ऊँचे-ऊँचे ध्वजों के समान ऊँचे वृक्षों से युक्त था तथा अत्यन्त सुन्दर दिखाई देता था। इस प्रकार राजा ने उत्तम गुणों से युक्त उस वन को भली-भाँति देखा॥17॥
 
That forest was spread on the banks of the river Malini and was full of tall trees like tall flags and looked very beautiful. The king thus observed that forest endowed with excellent qualities very well.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)