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mahabharat 1.70.16: उस वन में शीतल, सुगन्धित और सुखदायक वायु पुष्पों के पराग लेकर बार-बार वृक्षों के पास आती थी, मानो रमण की इच्छा से आती हो ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 70: तपोवन और कण्वके आश्रमका वर्णन तथा राजा दुष्यन्तका उस आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.70.16 
सुख: शीत: सुगन्धी च पुष्परेणुवहोऽनिल:।
परिक्रामन् वने वृक्षानुपैतीव रिरंसया॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उस वन में शीतल, सुगन्धित और सुखदायक वायु पुष्पों के पराग लेकर बार-बार वृक्षों के पास आती थी, मानो रमण की इच्छा से आती हो ॥16॥
 
In that forest, a cool, fragrant and soothing breeze came near the trees again and again carrying the pollen of flowers, as if by Raman's wish. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)