श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.7.9 
देवता: पितरस्तस्मात् पितरश्चापि देवता:।
एकीभूताश्च पूज्यन्ते पृथक्त्वेन च पर्वसु॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अतः देवता ही पितर हैं और पितर ही देवता हैं। विभिन्न पर्वों पर दोनों की पूजा एक रूप में तथा पृथक रूप में भी की जाती है।॥9॥
 
‘Therefore the gods are the ancestors and the ancestors are the gods. On various festivals both of them are worshipped in one form as well as separately.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)