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mahabharat 1.7.8: जल ही देवता है और जल ही पितर है। दर्श और पूर्णिमा यज्ञ पितर और देवताओं के लिए किए जाते हैं। 8.   |   mahabharat अध्याय 1.7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.7.8 
आपो देवगणा: सर्वे आप: पितृगणास्तथा।
दर्शश्च पौर्णमासश्च देवानां पितृभि: सह॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जल ही देवता है और जल ही पितर है। दर्श और पूर्णिमा यज्ञ पितर और देवताओं के लिए किए जाते हैं। 8.
 
‘Water is the god and water is the ancestors. The Darsha and Poornamas yagnas are performed for the ancestors and the gods. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)