Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.7.6: 'मैं योगसिद्धि के बल से अनेक रूपों में प्रकट होकर गार्हपत्य और दक्षिणाग्नि आदि मूर्तियों में, प्रतिदिन किये जाने वाले अग्निहोत्रों में, अनेक लोगों द्वारा किये जाने वाले अनुष्ठानों में, गर्भाधान आदि अनुष्ठानों में तथा ज्योतिषमह आदि मखों (यज्ञों) में सदैव निवास करता हूँ। 6॥ | mahabharat अध्याय 1.7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'मैं योगसिद्धि के बल से अनेक रूपों में प्रकट होकर गार्हपत्य और दक्षिणाग्नि आदि मूर्तियों में, प्रतिदिन किये जाने वाले अग्निहोत्रों में, अनेक लोगों द्वारा किये जाने वाले अनुष्ठानों में, गर्भाधान आदि अनुष्ठानों में तथा ज्योतिषमह आदि मखों (यज्ञों) में सदैव निवास करता हूँ। 6॥
'With the power of Yogasiddhi, I manifest myself in many forms and always reside in the idols like Garhapatya and Dakshinagni, in the Agnihotras performed daily, in the sessions conducted by many people, in the rituals like conception etc. and in the makhas (sacrifices) like Jyothistom etc. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥