Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.7.5: 'यद्यपि मुझमें तुम्हें शाप देने की शक्ति है, फिर भी मैं ऐसा नहीं करूँगा, क्योंकि मैं ब्राह्मणों का आदर करता हूँ। हे ब्राह्मण! यद्यपि तुम सब कुछ जानते हो, फिर भी मैं जो कुछ कह रहा हूँ, उसे ध्यानपूर्वक सुनो।॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शक्तोऽहमपि शप्तुं त्वां मान्यास्तु ब्राह्मणा मम।
जानतोऽपि च ते ब्रह्मन् कथयिष्ये निबोध तत्॥ ५॥
अनुवाद
'यद्यपि मुझमें तुम्हें शाप देने की शक्ति है, फिर भी मैं ऐसा नहीं करूँगा, क्योंकि मैं ब्राह्मणों का आदर करता हूँ। हे ब्राह्मण! यद्यपि तुम सब कुछ जानते हो, फिर भी मैं जो कुछ कह रहा हूँ, उसे ध्यानपूर्वक सुनो।॥5॥
'Even though I have the power to curse you, I will not do so because I respect Brahmins. O Brahman! Although you know everything, listen carefully to what I am telling you.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥