Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.7.29: इस प्रकार प्राचीन काल में भगवान अग्निदेव को महर्षि भृगु ने शाप दिया था। अग्नि के शाप से संबंधित प्राचीन इतिहास यही है। पुलोमा नामक राक्षस के विनाश और च्यवन ऋषि के जन्म की कथा भी यही है। 29॥ | mahabharat अध्याय 1.7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं स भगवाञ्छापं लेभेऽग्निर्भृगुत: पुरा।
एवमेष पुरावृत्त इतिहासोऽग्निशापज:।
पुलोम्नश्च विनाशोऽयं च्यवनस्य च सम्भव:॥ २९॥
अनुवाद
इस प्रकार प्राचीन काल में भगवान अग्निदेव को महर्षि भृगु ने शाप दिया था। अग्नि के शाप से संबंधित प्राचीन इतिहास यही है। पुलोमा नामक राक्षस के विनाश और च्यवन ऋषि के जन्म की कथा भी यही है। 29॥
Thus, in ancient times, Lord Agnidev was cursed by Maharishi Bhrigu. This is the ancient history related to the curse of fire. This is also the story of the destruction of the demon Puloma and the birth of the sage Chyavan. 29॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि पौलोमपर्वणि अग्निशापमोचने सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत पौलोमपर्वमें अग्निशापमोचनसम्बन्धी सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥