Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.7.23-25: इसके अतिरिक्त आपकी क्रव्याद मूर्ति (चिता की अग्नि जो कच्चे मांस या शवों को जलाती है) सब कुछ भस्म कर देगी। जैसे सूर्य की किरणों से स्पर्श होने पर सभी वस्तुएँ पवित्र मानी जाती हैं, वैसे ही आपकी ज्वालाओं से दग्ध होने पर सभी वस्तुएँ पवित्र हो जाएँगी। अग्निदेव! आप अपने ही प्रभाव से प्रकट हुए उत्तम तेज हैं; अतः हे विभो! आप अपने ही तेज से ऋषि के शाप को सत्य कर दीजिए और अपने मुख में रखे हुए अपने भाग सहित देवताओं का भाग भी ग्रहण कीजिए।॥23-25॥ | mahabharat अध्याय 1.7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसके अतिरिक्त आपकी क्रव्याद मूर्ति (चिता की अग्नि जो कच्चे मांस या शवों को जलाती है) सब कुछ भस्म कर देगी। जैसे सूर्य की किरणों से स्पर्श होने पर सभी वस्तुएँ पवित्र मानी जाती हैं, वैसे ही आपकी ज्वालाओं से दग्ध होने पर सभी वस्तुएँ पवित्र हो जाएँगी। अग्निदेव! आप अपने ही प्रभाव से प्रकट हुए उत्तम तेज हैं; अतः हे विभो! आप अपने ही तेज से ऋषि के शाप को सत्य कर दीजिए और अपने मुख में रखे हुए अपने भाग सहित देवताओं का भाग भी ग्रहण कीजिए।॥23-25॥
‘Apart from this, your Kravyad Murti (the fire of the pyre which burns raw meat or dead bodies) will consume everything. Just as all things are considered pure when touched by the rays of the sun, similarly everything will become pure when burnt by your flames. Agnidev! You are the excellent radiance that has appeared by your own influence; therefore, O Vibho! Make the curse of the sage come true by your own radiance and accept the share of the gods as well as your own, which is placed in your mouth as an offering.’॥ 23-25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥