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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना
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श्लोक 2
श्लोक
1.7.2
धर्मे प्रयतमानस्य सत्यं च वदत: समम्।
पृष्टो यदब्रवं सत्यं व्यभिचारोऽत्र को मम॥ २॥
अनुवाद
'मैं सदैव धर्म का पालन करता हूँ और पक्षपातरहित होकर सत्य बोलता हूँ; अतः यदि राक्षस के पूछने पर मैंने सत्य कहा, तो इसमें मेरा क्या दोष है?॥2॥
'I always strive for Dharma and speak the truth without bias; so if I told the truth when the demon asked me, what is my fault in that?॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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