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mahabharat 1.7.15: 'पापरहित देवों! अग्नि के लुप्त हो जाने से अग्निहोत्र आदि समस्त कर्म लुप्त हो गए हैं। इससे तीनों लोकों के प्राणी व्याकुल हो गए हैं; अतः इस विषय में जो भी आवश्यक हो, कृपा करके कीजिए। इसमें अधिक विलम्ब नहीं करना चाहिए। 15॥   |   mahabharat अध्याय 1.7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.7.15 
अग्निनाशात् क्रियाभ्रंशाद् भ्रान्ता लोकास्त्रयोऽनघा:।
विदध्वमत्र यत् कार्यं न स्यात् कालात्ययो यथा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'पापरहित देवों! अग्नि के लुप्त हो जाने से अग्निहोत्र आदि समस्त कर्म लुप्त हो गए हैं। इससे तीनों लोकों के प्राणी व्याकुल हो गए हैं; अतः इस विषय में जो भी आवश्यक हो, कृपा करके कीजिए। इसमें अधिक विलम्ब नहीं करना चाहिए। 15॥
 
'Sinless gods! Due to the disappearance of Agni, all the activities like Agnihotra etc. have disappeared. Due to this, the creatures of the three worlds have become bewildered; Therefore, please do whatever is necessary in this matter. There should not be much delay in this. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)