Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.7.12-14: उग्रश्रवाजी कहते हैं- महर्षि! तत्पश्चात् अग्निदेव ने कुछ विचार करके द्विजों के अग्निहोत्र, यज्ञ, सत्र तथा कर्मकाण्ड सम्बन्धी कार्यों से अपने को अलग कर लिया। तब अग्नि के बिना समस्त लोग ओंकार, वषट्कार, स्वधा और स्वाहा आदि से वंचित होकर अत्यन्त दुःखी हो गये। तब महर्षिगण अत्यन्त व्यथित होकर देवताओं के पास जाकर बोले- 12-14॥ | mahabharat अध्याय 1.7: शापसे कुपित हुए अग्निदेवका अदृश्य होना और ब्रह्माजीका उनके शापको संकुचित करके उन्हें प्रसन्न करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उग्रश्रवाजी कहते हैं- महर्षि! तत्पश्चात् अग्निदेव ने कुछ विचार करके द्विजों के अग्निहोत्र, यज्ञ, सत्र तथा कर्मकाण्ड सम्बन्धी कार्यों से अपने को अलग कर लिया। तब अग्नि के बिना समस्त लोग ओंकार, वषट्कार, स्वधा और स्वाहा आदि से वंचित होकर अत्यन्त दुःखी हो गये। तब महर्षिगण अत्यन्त व्यथित होकर देवताओं के पास जाकर बोले- 12-14॥
Ugrashravaji says- Maharshi! After that, after some thinking, Agnidev took himself away from the Agnihotra, Yagya, Satra and rituals related activities of the Dwijas. Then, without fire, all the people became very sad, being deprived of Omkar, Vashtkar, Swadha and Swaha etc. Then the great sages became extremely distressed and went to the gods and said – 12-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥