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mahabharat 1.69.31: बड़े-बड़े जंगली हाथियों ने भी वहाँ से भागते समय बहुत से लोगों को कुचल डाला। वहाँ सेनारूपी बादलों ने बाणों के रूप में जल की धाराएँ बरसाते हुए उस वन के आकाश को चारों ओर से घेर लिया था। वह वन जहाँ महाराज दुष्यंत ने सिंहों का वध किया था, भयंकर पशुओं से भरा हुआ, अत्यंत सुन्दर दिखाई दे रहा था।   |   mahabharat अध्याय 1.69: दुष्यन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 69: दुष्यन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.69.31 
वन्या गजवरास्तत्र ममृदुर्मनुजान् बहून्।
तद् वनं बलमेघेन शरधारेण संवृतम्।
व्यरोचत मृगाकीर्णं राज्ञा हतमृगाधिपम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
बड़े-बड़े जंगली हाथियों ने भी वहाँ से भागते समय बहुत से लोगों को कुचल डाला। वहाँ सेनारूपी बादलों ने बाणों के रूप में जल की धाराएँ बरसाते हुए उस वन के आकाश को चारों ओर से घेर लिया था। वह वन जहाँ महाराज दुष्यंत ने सिंहों का वध किया था, भयंकर पशुओं से भरा हुआ, अत्यंत सुन्दर दिखाई दे रहा था।
 
Big wild elephants also trampled many people while fleeing from there. There the clouds in the form of armies showering streams of water in the form of arrows had surrounded the forest sky from all sides. The forest where Maharaja Dushyant had killed the lions was looking very beautiful, full of ferocious animals.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि शकुन्तलोपाख्याने एकोनसप्ततितमोऽध्याय:॥ ६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें शकुन्तलोपाख्यानविषयक उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)