Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.69.19-22: वह स्थान हिरण, सिंह आदि भयंकर पशुओं तथा अन्य वनवासियों से सर्वत्र भरा हुआ था। पुरुषोत्तम राजा दुष्यंत अपने सेवकों, सैनिकों और घुड़सवारों के साथ नाना प्रकार के वन्य पशुओं का शिकार करते हुए उस वन को रौंदते रहे। वहाँ राजा दुष्यंत ने अपने बाणों से अनेक बाघों को मार डाला और अनेकों को अपने भालों से छेद डाला। बलवानों में श्रेष्ठ राजा ने दूर स्थित अनेक वन्य पशुओं को अपने बाणों से घायल कर दिया। जो निकट आ गए, उन्हें उन्होंने अपनी तलवार से काट डाला और शक्ति नामक अस्त्र से इस जाति के अनेक पशुओं का वध कर डाला। | mahabharat अध्याय 1.69: दुष्यन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह स्थान हिरण, सिंह आदि भयंकर पशुओं तथा अन्य वनवासियों से सर्वत्र भरा हुआ था। पुरुषोत्तम राजा दुष्यंत अपने सेवकों, सैनिकों और घुड़सवारों के साथ नाना प्रकार के वन्य पशुओं का शिकार करते हुए उस वन को रौंदते रहे। वहाँ राजा दुष्यंत ने अपने बाणों से अनेक बाघों को मार डाला और अनेकों को अपने भालों से छेद डाला। बलवानों में श्रेष्ठ राजा ने दूर स्थित अनेक वन्य पशुओं को अपने बाणों से घायल कर दिया। जो निकट आ गए, उन्हें उन्होंने अपनी तलवार से काट डाला और शक्ति नामक अस्त्र से इस जाति के अनेक पशुओं का वध कर डाला।
It was full of fierce animals like deer and lions and other forest dwellers everywhere. King Dushyant, the best of men, along with his servants, soldiers and riders, trampled that forest while hunting various kinds of wild animals. There, King Dushyant killed many tigers that were the target of his arrows and pierced many with his spears. The king, the best among powerful men, wounded many faraway wild animals with his arrows. Those that came close, he cut them with his sword and killed many animals of this species with the weapon called Shakti.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥