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mahabharat 1.69.16-17: उनका रथ गरुड़ के समान वेगवान था। उस पर सवार राजा अपनी गर्जना से पृथ्वी और आकाश को भर देते थे। भ्रमण करते हुए बुद्धिमान दुष्यंत ने नंदनवन के समान एक सुन्दर वन देखा, जो बेल, आक, खैर, कैथ और धव (बकाली) आदि वृक्षों से युक्त था॥ 16-17॥   |   mahabharat अध्याय 1.69: दुष्यन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 69: दुष्यन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  1.69.16-17 
सुपर्णप्रतिमेनाथ रथेन वसुधाधिप:।
महीमापूरयामास घोषेण त्रिदिवं तथा॥ १६॥
स गच्छन् ददृशे धीमान् नन्दनप्रतिमं वनम्।
बिल्वार्कखदिराकीर्णं कपित्थधवसंकुलम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उनका रथ गरुड़ के समान वेगवान था। उस पर सवार राजा अपनी गर्जना से पृथ्वी और आकाश को भर देते थे। भ्रमण करते हुए बुद्धिमान दुष्यंत ने नंदनवन के समान एक सुन्दर वन देखा, जो बेल, आक, खैर, कैथ और धव (बकाली) आदि वृक्षों से युक्त था॥ 16-17॥
 
His chariot was as swift as that of Garuda. The king travelling by it filled the earth and the sky with his rumbling sound. While travelling, the wise Dushyant saw a beautiful forest like Nandanvana, which was full of trees like Bel, Aak, Khair, Kaith and Dhava (Bakali) etc.॥ 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)