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mahabharat 1.69.10-11h: वहाँ उपस्थित स्त्रियाँ उसे वज्रधारी इन्द्र के समान समझकर आपस में इस प्रकार कहने लगीं - 'मित्रो! ध्यान से देखो, यह वही नरसिंह महाराज दुष्यंत हैं, जो युद्धस्थल में वसुओं के समान पराक्रम दिखाते हैं और जिनकी भुजाओं का बल शत्रुओं का नाश कर देता है।'॥10 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.69: दुष्यन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 69: दुष्यन्तका शिकारके लिये वनमें जाना और विविध हिंसक वन-जन्तुओंका वध करना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  1.69.10-11h 
पश्यन्त: स्त्रीगणास्तत्र वज्रपाणिं स्म मेनिरे।
अयं स पुरुषव्याघ्रो रणे वसुपराक्रम:॥ १०॥
यस्य बाहुबलं प्राप्य न भवन्त्यसुहृद्‍गणा:।
 
 
अनुवाद
वहाँ उपस्थित स्त्रियाँ उसे वज्रधारी इन्द्र के समान समझकर आपस में इस प्रकार कहने लगीं - 'मित्रो! ध्यान से देखो, यह वही नरसिंह महाराज दुष्यंत हैं, जो युद्धस्थल में वसुओं के समान पराक्रम दिखाते हैं और जिनकी भुजाओं का बल शत्रुओं का नाश कर देता है।'॥10 1/2॥
 
The women watching there thought him to be like the thunderbolt-wielding Indra and began talking among themselves thus - 'Friends! Look carefully, this is the same man-lion Maharaja Dushyant, who displays valour like the Vasus in the battle-field, and whose strength of arms wipes out the existence of the enemies.'॥10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)