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mahabharat 1.68.4-5: राजा दुष्यंत पृथ्वी के चारों भागों और समुद्र से घिरे हुए समस्त देशों पर शासन करते थे। वे अनेक युद्धों में विजयी हुए थे। वे शत्रुमर्दन राजा ही रत्नाकर सागर तक फैले हुए, चारों वर्णों से युक्त और म्लेच्छ देश की सीमा से लगे हुए समस्त प्रदेशों पर शासन और रक्षा करते थे।॥4-5॥   |   mahabharat अध्याय 1.68: राजा दुष्यन्तकी अद्‍भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 68: राजा दुष्यन्तकी अद्‍भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  1.68.4-5 
चतुर्भागं भुव: कृत्स्नं यो भुङ्‍क्ते मनुजेश्वर:।
समुद्रावरणांश्चापि देशान् स समितिंजय:॥ ४॥
आम्लेच्छावधिकान् सर्वान् स भुङ्‍क्ते रिपुमर्दन:।
रत्नाकरसमुद्रान्तांश्चातुर्वर्ण्यजनावृतान्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा दुष्यंत पृथ्वी के चारों भागों और समुद्र से घिरे हुए समस्त देशों पर शासन करते थे। वे अनेक युद्धों में विजयी हुए थे। वे शत्रुमर्दन राजा ही रत्नाकर सागर तक फैले हुए, चारों वर्णों से युक्त और म्लेच्छ देश की सीमा से लगे हुए समस्त प्रदेशों पर शासन और रक्षा करते थे।॥4-5॥
 
King Dushyant ruled all the four parts of the earth and all the countries covered by the ocean. He was victorious in many wars. That Shatrumardan king alone ruled and protected all the lands extending up to the Ratnakar ocean, full of people of all four castes and bordering the mlechha country.॥ 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)