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mahabharat 1.68.3: वैशम्पायनजी बोले - भरतवंशशिरोमणि! पुरुवंश का विस्तार करने वाले एक राजा थे, जिनका नाम दुष्यंत था। वे महान योद्धा तथा चारों समुद्रों से घिरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी के रक्षक थे। 3॥   |   mahabharat अध्याय 1.68: राजा दुष्यन्तकी अद्‍भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 68: राजा दुष्यन्तकी अद्‍भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.68.3 
वैशम्पायन उवाच
पौरवाणां वंशकरो दुष्यन्तो नाम वीर्यवान्।
पृथिव्याश्चतुरन्ताया गोप्ता भरतसत्तम॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - भरतवंशशिरोमणि! पुरुवंश का विस्तार करने वाले एक राजा थे, जिनका नाम दुष्यंत था। वे महान योद्धा तथा चारों समुद्रों से घिरी हुई सम्पूर्ण पृथ्वी के रक्षक थे। 3॥
 
Vaishampayanji said – Bharatvanshshiromane! There was one king who expanded the Puruvansh, whose name was Dushyant. He was a great warrior and the guardian of the entire earth surrounded by the four seas. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)