Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.68.14-15: वे समुद्र के समान अजेय और पृथ्वी के समान सहनशील थे । महाराज दुष्यंत का सर्वत्र सम्मान था । उनके नगर और राष्ट्र की प्रजा सदैव सुखी रहती थी । वे अत्यंत धार्मिक भाव से सदैव प्रसन्न रहने वाले लोगों पर शासन करते थे ॥14-15॥ | mahabharat अध्याय 1.68: राजा दुष्यन्तकी अद्भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे समुद्र के समान अजेय और पृथ्वी के समान सहनशील थे । महाराज दुष्यंत का सर्वत्र सम्मान था । उनके नगर और राष्ट्र की प्रजा सदैव सुखी रहती थी । वे अत्यंत धार्मिक भाव से सदैव प्रसन्न रहने वाले लोगों पर शासन करते थे ॥14-15॥
He was as unstoppable as the ocean and as tolerant as the earth. Maharaja Dushyant was respected everywhere. The people of his city and nation were always happy. He ruled over people who were always happy with a very religious attitude.॥ 14-15॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि शकुन्तलोपाख्याने अष्टषष्टितमोऽध्याय:॥ ६८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें शकुन्तलोपाख्यानविषयक अड़सठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥