Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.68.11: ब्राह्मण अपने वर्णाश्रम के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करते थे। उनमें झूठ और छल-कपट का नामोनिशान नहीं था। राजा दुष्यंत स्वयं युवा थे। उनका शरीर वज्र के समान दृढ़ था। वे अद्भुत और महान पराक्रम से संपन्न थे॥11॥ | mahabharat अध्याय 1.68: राजा दुष्यन्तकी अद्भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वकर्मनिरता विप्रा नानृतं तेषु विद्यते।
स चाद्भुतमहावीर्यो वज्रसंहननो युवा॥ ११॥
अनुवाद
ब्राह्मण अपने वर्णाश्रम के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करते थे। उनमें झूठ और छल-कपट का नामोनिशान नहीं था। राजा दुष्यंत स्वयं युवा थे। उनका शरीर वज्र के समान दृढ़ था। वे अद्भुत और महान पराक्रम से संपन्न थे॥11॥
The Brahmins were dedicated to their duties as per their Varnasram. There was no lie and deceit among them. King Dushyant himself was a young man. His body was as strong as a thunderbolt. He was endowed with amazing and great valour.॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥