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mahabharat 1.68.10: बादल समय पर वर्षा करते और फसलें रसीली होतीं। पृथ्वी सब प्रकार के रत्नों और पशुओं से समृद्ध थी॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.68: राजा दुष्यन्तकी अद्‍भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 68: राजा दुष्यन्तकी अद्‍भुत शक्ति तथा राज्यशासनकी क्षमताका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.68.10 
कालवर्षी च पर्जन्य: सस्यानि रसवन्ति च।
सर्वरत्नसमृद्धा च मही पशुमती तथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
बादल समय पर वर्षा करते और फसलें रसीली होतीं। पृथ्वी सब प्रकार के रत्नों और पशुओं से समृद्ध थी॥10॥
 
The clouds would rain in time and the crops would be juicy. The earth was rich in all kinds of gems and livestock.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)