श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  1.67.87 
कलेरंशस्तु संजज्ञे भुवि दुर्योधनो नृप:।
दुर्बुद्धिर्दुर्मतिश्चैव कुरूणामयशस्कर:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
कालिका का एक अंश इस पृथ्वी पर राजा दुर्योधन के रूप में उत्पन्न हुआ, जो कुबुद्धि और दुष्ट विचारों वाला तथा कुरुवंश का कलंक था ॥87॥
 
A part of Kalika was born on this earth in the form of King Duryodhana, who was a person of bad intellect and evil thoughts and who was the disgrace of the Kuru clan. ॥ 87॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)