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mahabharat 1.67.82: शत्रु राष्ट्र को कष्ट देने वाले शत्रुमर्दन राजा विराट भी मरुद्गणों से ही उत्पन्न हुए हैं, ऐसा विचार करो ॥82॥   |   mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.67.82 
मरुतां तु गणाद् विद्धि संजातमरिमर्दनम्।
विराटं नाम राजानं परराष्ट्रप्रतापनम्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
शत्रु राष्ट्र को कष्ट देने वाले शत्रुमर्दन राजा विराट भी मरुद्गणों से ही उत्पन्न हुए हैं, ऐसा विचार करो ॥82॥
 
Consider that Shatrumardan King Virat, who tormented the enemy nation, also originated from the Marudganas. 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)