श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.67.80 
द्रुपदश्चैव राजर्षिस्तत एवाभवद् गणात्।
मानुषे नृप लोकेऽस्मिन् सर्वशस्त्रभृतां वर:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
हे राजा जनमेजय! समस्त शस्त्रधारी मुनियों में श्रेष्ठ द्रुपद भी उसी मरुद्गण से इस मनुष्य लोक में उत्पन्न हुए हैं ॥80॥
 
King Janamejaya! Drupada, the best among all weapon-wielding sages, was also born in this human world from that Marudgana. 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)