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mahabharat 1.67.60-65: मद्रक, कर्णवेश, सिद्धार्थ, किटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लीक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्री नील राजा, चीरवासा, भूमिपाल, दंतवक्त्र, राक्षस दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ़, वायुवेग, भूरितेज, एकलव्य, सुमित्र, वतधन, गोमुख, करुषदेश के कई राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेमा, उग्रतीर्थ, कलिंग के राजा कुहर और सबसे बुद्धिमान लोगों के राजा ईश्वर। 60-65   |   mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 60-65
 
 
श्लोक  1.67.60-65 
मद्रक: कर्णवेष्टश्च सिद्धार्थ: कीटकस्तथा।
सुवीरश्च सुबाहुश्च महावीरोऽथ बाह्लिक:॥ ६०॥
क्रथो विचित्र: सुरथ: श्रीमान् नीलश्च भूमिप:।
चीरवासाश्च कौरव्य भूमिपालश्च नामत:॥ ६१॥
दन्तवक्त्रश्च नामासीद् दुर्जयश्चैव दानव:।
रुक्मी च नृपशार्दूलो राजा च जनमेजय:॥ ६२॥
आषाढो वायुवेगश्च भूरितेजास्तथैव च।
एकलव्य: सुमित्रश्च वाटधानोऽथ गोमुख:॥ ६३॥
कारूषकाश्च राजान: क्षेमधूर्तिस्तथैव च।
श्रुतायुरुद्वहश्चैव बृहत्सेनस्तथैव च॥ ६४॥
क्षेमोग्रतीर्थ: कुहर: कलिङ्गेषु नराधिप:।
मतिमांश्च मनुष्येन्द्र ईश्वरश्चेति विश्रुत:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
मद्रक, कर्णवेश, सिद्धार्थ, किटक, सुवीर, सुबाहु, महावीर, बाह्लीक, क्रथ, विचित्र, सुरथ, श्री नील राजा, चीरवासा, भूमिपाल, दंतवक्त्र, राक्षस दुर्जय, नृपश्रेष्ठ रुक्मी, राजा जनमेजय, आषाढ़, वायुवेग, भूरितेज, एकलव्य, सुमित्र, वतधन, गोमुख, करुषदेश के कई राजा, क्षेमधूर्ति, श्रुतायु, उद्वह, बृहत्सेन, क्षेमा, उग्रतीर्थ, कलिंग के राजा कुहर और सबसे बुद्धिमान लोगों के राजा ईश्वर। 60-65
 
Madrak, Karnavesh, Siddhartha, Kitak, Suveer, Subahu, Mahavir, Bahlik, Krath, Vichitra, Surath, Mr. Neel King, Chirvasa, Bhumipala, Dantavaktra, demon Durjay, Nripashrestha Rukmi, King Janamejaya, Ashadh, Vayuvega, Bhuriteja, Ekalavya, Sumitra, Vatdhan, Gomukh, many kings of Karushdesh, Kshemadhurti, Shrutayu, Udvah, Brihatsena, Kshema, Ugratirtha, King Kuhar of Kalinga and Ishwar, the king of the most intelligent people. 60-65
 
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