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mahabharat 1.67.54: उनमें सातवाँ दैत्यराज समुद्रसेन था, जो समुद्र से लेकर महासागरों तक सारी पृथ्वी पर विख्यात था और धर्म और अर्थशास्त्र का विशेषज्ञ था ॥54॥   |   mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  1.67.54 
समुद्रसेनस्तु नृपस्तेषामेवाभवद् गणात्।
विश्रुत: सागरान्तायां क्षितौ धर्मार्थतत्त्ववित्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उनमें सातवाँ दैत्यराज समुद्रसेन था, जो समुद्र से लेकर महासागरों तक सारी पृथ्वी पर विख्यात था और धर्म और अर्थशास्त्र का विशेषज्ञ था ॥54॥
 
The seventh demon king among them was Samudra Sen, who was famous all over the earth from the sea to the oceans and was an expert in religion and economics. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)