vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन
»
श्लोक 50
श्लोक
1.67.50
तृतीयस्तु महातेजा महामायो महासुर:।
निषादाधिपतिर्जज्ञे भुवि भीमपराक्रम:॥ ५०॥
अनुवाद
तीसरा जो महान, तेजस्वी और मायावी महादैत्य था, वह इस पृथ्वी पर भयंकर पराक्रमी निषादनरेश के रूप में उत्पन्न हुआ ॥50॥
The third one, who was a great, brilliant and illusive great demon, was born on this earth in the form of the fiercely mighty Nishadanresh. 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×