Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.67.3-5: वैशम्पायनजी बोले - नरेन्द्र! सबसे पहले मैं तुम्हें मनुष्यों में उत्पन्न हुए समस्त देवताओं और दैत्यों के जन्मों का परिचय देता हूँ। जो दैत्यों का राजा विप्रचित्ति नाम से प्रसिद्ध हुआ, वही मनुष्यों में श्रेष्ठ जरासंध नाम से प्रसिद्ध हुआ। राजन! हिरण्यकशिपु नाम से प्रसिद्ध दितिक का पुत्र ही श्रेष्ठ सन्तान उत्पन्न करने वाला होकर मनुष्य लोक में उत्पन्न हुआ। 3-5॥ | mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
मानुषेषु मनुष्येन्द्र सम्भूता ये दिवौकस:।
प्रथमं दानवांश्चैव तांस्ते वक्ष्यामि सर्वश:॥ ३॥
विप्रचित्तिरिति ख्यातो य आसीद् दानवर्षभ:।
जरासन्ध इति ख्यात: स आसीन्मनुजर्षभ:॥ ४॥
दिते: पुत्रस्तु यो राजन् हिरण्यकशिपु: स्मृत:।
स जज्ञे मानुषे लोके शिशुपालो नरर्षभ:॥ ५॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - नरेन्द्र! सबसे पहले मैं तुम्हें मनुष्यों में उत्पन्न हुए समस्त देवताओं और दैत्यों के जन्मों का परिचय देता हूँ। जो दैत्यों का राजा विप्रचित्ति नाम से प्रसिद्ध हुआ, वही मनुष्यों में श्रेष्ठ जरासंध नाम से प्रसिद्ध हुआ। राजन! हिरण्यकशिपु नाम से प्रसिद्ध दितिक का पुत्र ही श्रेष्ठ सन्तान उत्पन्न करने वाला होकर मनुष्य लोक में उत्पन्न हुआ। 3-5॥
Vaishampayanji said – Narendra! First of all, I am introducing you to the births of all the gods and demons who appeared among humans. The one who was the king of demons, known by the name Viprachitti, became famous by the name Jarasandha, the best among humans. Rajan! Ditika's son, famous by the name of Hiranyakashipu, was born in the human world as the best child-bearer. 3-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥