Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.67.164: देवता, गन्धर्व और दानवों के इस अंशावतार की कथा सुनकर, जगत् की उत्पत्ति और संहार के कारण भगवान् के स्वरूप को जानने वाला बुद्धिमान पुरुष महान् विपत्तियों के आने पर भी शोक नहीं करता ॥164॥ | mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अंशावतरणं श्रुत्वा देवगन्धर्वरक्षसाम्।
प्रभवाप्ययवित् प्राज्ञो न कृच्छ्रेष्ववसीदति॥ १६४॥
अनुवाद
देवता, गन्धर्व और दानवों के इस अंशावतार की कथा सुनकर, जगत् की उत्पत्ति और संहार के कारण भगवान् के स्वरूप को जानने वाला बुद्धिमान पुरुष महान् विपत्तियों के आने पर भी शोक नहीं करता ॥164॥
Hearing this partial incarnation of the gods, Gandharvas and demons, a wise man who knows the nature of God who is the source of the origin and destruction of the world does not feel sad even in the face of great calamities. 164॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि अंशावतरणसमाप्तौ सप्तषष्टितमोऽध्याय:॥ ६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें अंशावतरणसमाप्तिविषयक सड़सठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥