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mahabharat 1.67.159: वह समस्त शुभ लक्षणों से युक्त और वैदूर्य मणि के समान तेजस्वी थी। एकान्त में रहकर वह पाँचों पुरुषप्रधान पाण्डवों के मन को मोहित करती रहती थी। 159॥   |   mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 159
 
 
श्लोक  1.67.159 
सर्वलक्षणसम्पूर्णा वैदूर्यमणिसंनिभा।
पञ्चानां पुरुषेन्द्राणां चित्तप्रमथनी रह:॥ १५९॥
 
 
अनुवाद
वह समस्त शुभ लक्षणों से युक्त और वैदूर्य मणि के समान तेजस्वी थी। एकान्त में रहकर वह पाँचों पुरुषप्रधान पाण्डवों के मन को मोहित करती रहती थी। 159॥
 
She was full of all auspicious traits and was as radiant as a Vaidurya gem. Living in solitude, she kept enchanting the minds of the five male-dominated Pandavas. 159॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)