श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  1.67.153 
एवमन्ये मनुष्येन्द्रा बहवोंऽशा दिवौकसाम्।
जज्ञिरे वसुदेवस्य कुले कुलविवर्धना:॥ १५३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वसुदेवजी के कुल में और भी बहुत से नरेन्द्र उत्पन्न हुए, जो देवताओं के अंश थे। वे सभी अपने कुल की वृद्धि करने वाले थे॥153॥
 
In this way many other Narendras were born in the clan of Vasudevji, who were the parts of the gods. All of them were going to increase the size of their clan.॥ 153॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)