Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.67.145-146: कर्ण ने अपने शरीर से चिपके हुए कवच और कुण्डल उतार दिए। इन्द्र ने चकित होकर कर्ण को एक शक्ति प्रदान की और कहा - 'दुर्दर्श वीर! देवता, दानव, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षसों में से जिस पर भी तुम इस शक्ति का प्रयोग करोगे, वह निश्चय ही अपने प्राण खो देगा।' 145-146॥ | mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्ण ने अपने शरीर से चिपके हुए कवच और कुण्डल उतार दिए। इन्द्र ने चकित होकर कर्ण को एक शक्ति प्रदान की और कहा - 'दुर्दर्श वीर! देवता, दानव, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षसों में से जिस पर भी तुम इस शक्ति का प्रयोग करोगे, वह निश्चय ही अपने प्राण खो देगा।' 145-146॥
Karna removed the armor and earrings stuck to his body. Indra was astonished and gave a power to Karna and said – 'Durdarsha brave! On whomever you use this power among gods, demons, humans, Gandharvas, serpents and demons, that person will definitely lose his life. 145-146॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥