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mahabharat 1.67.139: उस समय कुन्ती ने अपने माता-पिता तथा अन्य बन्धु-बान्धवों के भय से उस तेजस्वी पुत्र को एक पिटारी में छिपाकर जल में छोड़ दिया॥139॥   |   mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  1.67.139 
निगूहमाना जातं वै बन्धुपक्षभयात् तदा।
उत्ससर्ज जले कुन्ती तं कुमारं यशस्विनम्॥ १३९॥
 
 
अनुवाद
उस समय कुन्ती ने अपने माता-पिता तथा अन्य बन्धु-बान्धवों के भय से उस तेजस्वी पुत्र को एक पिटारी में छिपाकर जल में छोड़ दिया॥139॥
 
At that time Kunti, fearing her parents and other relatives, hid that illustrious son in a box and left him in the water.॥ 139॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)