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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन
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श्लोक 135
श्लोक
1.67.135
यं यं देवं त्वमेतेन मन्त्रेणावाहयिष्यसि।
तस्य तस्य प्रसादात् त्वं देवि पुत्राञ्जनिष्यसि॥ १३५॥
अनुवाद
‘देवि! इस मन्त्र से तुम जिस भी देवता का आवाहन करोगी, उस देवता की कृपा से तुम्हें पुत्र की प्राप्ति होगी ॥135॥
'Devi! Whichever deity you invoke with this mantra, by the grace of that deity you will give birth to a son.'॥ 135॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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