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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन
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श्लोक 130
श्लोक
1.67.130
पितु: स्वस्रीयपुत्राय सोऽनपत्याय वीर्यवान्।
अग्रमग्रे प्रतिज्ञाय स्वस्यापत्यस्य वै तदा॥ १३०॥
अनुवाद
उग्रसेन के चचेरे भाई कुन्तीभोज निःसंतान थे। वीर शूरसेन ने एक बार उनसे यह प्रतिज्ञा की थी कि 'मैं तुम्हें अपनी पहली संतान दूँगा'॥130॥
Ugrasen's cousin Kunti Bhoja was childless. The valiant Shurasena had once made a vow to him that 'I will give you my first child'.॥ 130॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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