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mahabharat 1.67.127: हे भारत! तुम्हें यह जानना चाहिए कि द्रौपदी के पांचों पुत्र पांच विश्वदेवों के ही स्वरूप थे।   |   mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.67.127 
द्रौपदेयाश्च ये पञ्च बभूवुर्भरतर्षभ।
विश्वान् देवगणान् विद्धि संजातान् भरतर्षभ॥ १२७॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! तुम्हें यह जानना चाहिए कि द्रौपदी के पांचों पुत्र पांच विश्वदेवों के ही स्वरूप थे।
 
O Bharata, you should know that the five sons of Draupadi were the manifestations of the five Vishvadevas. 127
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)