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mahabharat 1.67.115: पृथ्वीपर दैत्योंका संहार करना देवताओंका कार्य है और हम सब लोगोंके करने योग्य है। अतः यह वर्चा उस कार्यको सम्पन्न करनेके लिए वहाँ अवश्य जाएगा। परन्तु वह वहाँ अधिक समयतक नहीं ठहर सकेगा ॥115॥   |   mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  1.67.115 
सुरकार्यं हि न: कार्यमसुराणां क्षितौ वध:।
तत्र यास्यत्ययं वर्चा न च स्थास्यति वै चिरम्॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीपर दैत्योंका संहार करना देवताओंका कार्य है और हम सब लोगोंके करने योग्य है। अतः यह वर्चा उस कार्यको सम्पन्न करनेके लिए वहाँ अवश्य जाएगा। परन्तु वह वहाँ अधिक समयतक नहीं ठहर सकेगा ॥115॥
 
‘Killing the demons on earth is the task of the gods and it is worthy of being done by all of us. Therefore, this Varcha will definitely go there to accomplish that task. But he will not be able to stay there for long. ॥ 115॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)