श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  1.67.114 
नाहं दद्यां प्रियं पुत्रं मम प्राणैर्गरीयसम्।
समय: क्रियतामेष न शक्यमतिवर्तितुम्॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
मेरा पुत्र मुझे प्राणों से भी अधिक प्रिय है, अतः मैं उसे अधिक समय तक त्याग नहीं सकता । अतः मृत्युलोक में उसके रहने की अवधि निश्चित कर देनी चाहिए । फिर उस अवधि का उल्लंघन नहीं किया जा सकता ॥114॥
 
‘My son is dearer to me than my life, therefore I cannot give him up for a longer period. Therefore a period of his stay in the mortal world should be fixed. Then that period cannot be violated.॥ 114॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)