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mahabharat 1.67.1-2: जनमेजय बोले - हे प्रभु! मैं देवताओं, दानवों, गन्धर्वों, नागों, राक्षसों, सिंहों, व्याघ्रों, मृगों, सर्पों, पक्षियों तथा अंशतः मनुष्य योनि में उत्पन्न हुए समस्त भूतों के जन्म की सच्ची कथा सुनना चाहता हूँ। मैं मनुष्यों में श्रेष्ठ पुरुष तथा इन समस्त प्राणियों के जन्म और कर्म का विस्तृत वर्णन सुनना चाहता हूँ। 1-2॥   |   mahabharat अध्याय 1.67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 67: देवता और दैत्य आदिके अंशावतारोंका दिग्दर्शन  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.67.1-2 
जनमेजय उवाच
देवानां दानवानां च गन्धर्वोरगरक्षसाम्।
सिंहव्याघ्रमृगाणां च पन्नगानां पतत्त्रिणाम्॥ १॥
सर्वेषां चैव भूतानां सम्भवं भगवन्नहम्।
श्रोतुमिच्छामि तत्त्वेन मानुषेषु महात्मनाम्।
जन्म कर्म च भूतानामेतेषामनुपूर्वश:॥ २॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय बोले - हे प्रभु! मैं देवताओं, दानवों, गन्धर्वों, नागों, राक्षसों, सिंहों, व्याघ्रों, मृगों, सर्पों, पक्षियों तथा अंशतः मनुष्य योनि में उत्पन्न हुए समस्त भूतों के जन्म की सच्ची कथा सुनना चाहता हूँ। मैं मनुष्यों में श्रेष्ठ पुरुष तथा इन समस्त प्राणियों के जन्म और कर्म का विस्तृत वर्णन सुनना चाहता हूँ। 1-2॥
 
Janamejaya said – Lord! I want to hear the true story of the birth of gods, demons, Gandharvas, serpents, demons, lions, tigers, deers, snakes, birds and all the ghosts who were partially born in the human form. I want to hear the detailed description of the birth and karma of the great man among humans and of all these living beings. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)