हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने समस्त महाभूतों की उत्पत्ति का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। इसे भली-भाँति सुनने से मनुष्य समस्त पापों से पूर्णतः मुक्त हो जाता है तथा केवलज्ञान एवं परमपद को प्राप्त होता है। ॥ 71-72॥
O King Janamejaya, the best among the wise! Thus have I described the origin of all the great elements in detail. By listening to this well, a man becomes completely free from all sins and attains omniscience and the highest state. ॥ 71-72॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि षट्षष्टितमोऽध्याय:॥ ६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें अंशावतरणविषयक छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७६ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥