Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.66.71-72: हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने समस्त महाभूतों की उत्पत्ति का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। इसे भली-भाँति सुनने से मनुष्य समस्त पापों से पूर्णतः मुक्त हो जाता है तथा केवलज्ञान एवं परमपद को प्राप्त होता है। ॥ 71-72॥ | mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे बुद्धिमानों में श्रेष्ठ राजा जनमेजय! इस प्रकार मैंने समस्त महाभूतों की उत्पत्ति का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। इसे भली-भाँति सुनने से मनुष्य समस्त पापों से पूर्णतः मुक्त हो जाता है तथा केवलज्ञान एवं परमपद को प्राप्त होता है। ॥ 71-72॥
O King Janamejaya, the best among the wise! Thus have I described the origin of all the great elements in detail. By listening to this well, a man becomes completely free from all sins and attains omniscience and the highest state. ॥ 71-72॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि षट्षष्टितमोऽध्याय:॥ ६६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें अंशावतरणविषयक छाछठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७६ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥