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mahabharat 1.66.68: तत्पश्चात् रोहिणी ने विमला और अनला नामक दो और पुत्रियों को जन्म दिया । रोहिणी से ही गाय-बैल तथा गंधर्वी से घोड़े पुत्ररूप में उत्पन्न हुए । उनला ने सात प्रकार के वृक्ष उत्पन्न किए, जिनमें पिंडरूपी फल लगते हैं । 68 ॥   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.66.68 
विमलामपि भद्रं ते अनलामपि भारत।
रोहिण्यां जज्ञिरे गावो गन्धर्व्यां वाजिन: सुता:।
सप्त पिण्डफलान् वृक्षाननलापि व्यजायत॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रोहिणी ने विमला और अनला नामक दो और पुत्रियों को जन्म दिया । रोहिणी से ही गाय-बैल तथा गंधर्वी से घोड़े पुत्ररूप में उत्पन्न हुए । उनला ने सात प्रकार के वृक्ष उत्पन्न किए, जिनमें पिंडरूपी फल लगते हैं । 68 ॥
 
India After that Rohini gave birth to two more daughters named Vimala and Anala. From Rohini only cows and bulls and from Gandharvi horses were born as sons. Unala created seven types of trees, which bear pinda-shaped fruits. 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)