श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.66.53 
प्रजानामन्नकामानामन्योन्यपरिभक्षणात्।
अधर्मस्तत्र संजात: सर्वभूतविनाशक:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् एक समय ऐसा आया जब भूख से पीड़ित होकर मनुष्य एक दूसरे को मारकर खाने लगे। उस समय समस्त प्राणियों का नाश करने वाली दुष्टता प्रकट हुई ॥ 53॥
 
Thereafter a time came when the people, afflicted by hunger, began to kill and eat one another for food. At that time evil appeared, which destroys all creatures. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)