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mahabharat 1.66.51-52: कमलों में निवास करने वाली लक्ष्मीदेवी का शुभ स्वरूप उन दोनों की बहन है। आकाश में विचरण करने वाले घोड़े लक्ष्मीदेवी के मानस पुत्र हैं। राजन! वरुण के बीज से उनकी ज्येष्ठ पत्नी देवी ने एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया। उनके पुत्र को बल और देवनन्दिनी की पुत्री को सुरा समझो। 51-52॥   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  1.66.51-52 
तयोरेव स्वसा देवी लक्ष्मी: पद्मगृहा शुभा।
तस्यास्तु मानसा: पुत्रास्तुरगा व्योमचारिण:॥ ५१॥
वरुणस्य भार्या या ज्येष्ठा शुक्राद् देवी व्यजायत।
तस्या: पुत्रं बलं विद्धि सुरां च सुरनन्दिनीम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
कमलों में निवास करने वाली लक्ष्मीदेवी का शुभ स्वरूप उन दोनों की बहन है। आकाश में विचरण करने वाले घोड़े लक्ष्मीदेवी के मानस पुत्र हैं। राजन! वरुण के बीज से उनकी ज्येष्ठ पत्नी देवी ने एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया। उनके पुत्र को बल और देवनन्दिनी की पुत्री को सुरा समझो। 51-52॥
 
The auspicious form of Lakshmidevi who resides in lotuses is the sister of both of them. The horses roaming in the sky are the mental sons of Lakshmidevi. Rajan! From the seed of Varuna, his eldest wife Devi gave birth to a son and a daughter. Consider his son as Bala and Devnandini's daughter as Sura. 51-52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)