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mahabharat 1.66.5-6: अंगिरा के तीन पुत्र हुए, जो संसार में सर्वत्र विख्यात हैं। उनके नाम हैं बृहस्पति, उथय और संवर्त। ये तीनों महान व्रतपालक हैं। हे मनुदेव! ऐसा सुना जाता है कि अत्रिका के बहुत से पुत्र हुए। ये सभी वेदों के ज्ञाता, सिद्ध ऋषि और शान्त चित्त वाले हैं। ॥5-6॥   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  1.66.5-6 
त्रयस्त्वङ्गिरस: पुत्रा लोके सर्वत्र विश्रुता:।
बृहस्पतिरुतथ्यश्च संवर्तश्च धृतव्रता:॥ ५॥
अत्रेस्तु बहव: पुत्रा: श्रूयन्ते मनुजाधिप।
सर्वे वेदविद: सिद्धा: शान्तात्मानो महर्षय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अंगिरा के तीन पुत्र हुए, जो संसार में सर्वत्र विख्यात हैं। उनके नाम हैं बृहस्पति, उथय और संवर्त। ये तीनों महान व्रतपालक हैं। हे मनुदेव! ऐसा सुना जाता है कि अत्रिका के बहुत से पुत्र हुए। ये सभी वेदों के ज्ञाता, सिद्ध ऋषि और शान्त चित्त वाले हैं। ॥5-6॥
 
Angira had three sons, who are famous everywhere in the world. Their names are Brihaspati, Utthaya and Samvarta. All three of them are great observers of vows. O Lord of all Manus! It is heard that Atrika had many sons. All of them are experts in Vedas, accomplished sages and have a calm mind. ॥ 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)