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mahabharat 1.66.48: महात्मा जमदग्नि के चार पुत्र थे, जिनमें परशुराम सबसे छोटे थे; किन्तु उनके गुण भी कम नहीं थे। वे महान गुणों से सुशोभित थे, समस्त अस्त्र-शस्त्रों में निपुण थे, क्षत्रिय कुल का संहार करने वाले थे और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाले थे।   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.66.48 
जमदग्नेस्तु चत्वार आसन् पुत्रा महात्मन:।
रामस्तेषां जघन्योऽभूदजघन्यैर्गुणैर्युत:।
सर्वशस्त्रेषु कुशल: क्षत्रियान्तकरो वशी॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
महात्मा जमदग्नि के चार पुत्र थे, जिनमें परशुराम सबसे छोटे थे; किन्तु उनके गुण भी कम नहीं थे। वे महान गुणों से सुशोभित थे, समस्त अस्त्र-शस्त्रों में निपुण थे, क्षत्रिय कुल का संहार करने वाले थे और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाले थे।
 
Mahatma Jamadagni had four sons, of whom Parashurama was the youngest; but his qualities were not less. He was adorned with great virtues, was skilled in all the weapons, was the destroyer of the Kshatriya clan and had controlled his senses. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)