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mahabharat 1.66.47: वह अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी था। बचपन से ही अनेक सद्गुणों ने उसकी सुन्दरता को निखारना शुरू कर दिया था। और्व के पुत्र ऋचीक और ऋचीक के पुत्र जमदग्नि हुए।   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.66.47 
महातेजा महावीर्यो बाल एव गुणैर्युत:।
ऋचीकस्तस्य पुत्रस्तु जमदग्निस्ततोऽभवत्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
वह अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी था। बचपन से ही अनेक सद्गुणों ने उसकी सुन्दरता को निखारना शुरू कर दिया था। और्व के पुत्र ऋचीक और ऋचीक के पुत्र जमदग्नि हुए।
 
He was very radiant and very powerful. Many good qualities started enhancing his beauty in his childhood itself. Aurva's son was Richik and Richik's son was Jamadagni.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)