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च्यवनं दीप्ततपसं धर्मात्मानं यशस्विनम्।
य: स रोषाच्च्युतो गर्भान्मातुर्मोक्षाय भारत॥ ४५॥
अनुवाद
जिनका नाम च्यवन था । महर्षि च्यवन की तपस्या सदैव प्रज्वलित रहती है । वे पुण्यवान और यशस्वी हैं । हे भारत! अपनी माता को संकट से बचाने के लिए उन्होंने क्रोध करके उन्हें गर्भ से बाहर निकाल दिया था (इसीलिए उनका नाम च्यवन पड़ा ॥ 45॥
Whose name was Chyavan. Maharishi Chyavan's penance is always ignited. He is virtuous and famous. O Bharata! To save his mother from danger, he was thrown out of the womb in anger (that is why he was called Chyavan).॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥