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mahabharat 1.66.44: जब ब्रह्माजी ने भृगु के पुत्र शुक्र को जगत् के कल्याण के लिए नियुक्त किया, तब महर्षि भृगु ने एक और अबोध पुत्र को जन्म दिया ॥44॥   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.66.44 
तस्मिन् नियुक्ते विधिना योगक्षेमाय भार्गवे।
अन्यमुत्पादयामास पुत्रं भृगुरनिन्दितम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जब ब्रह्माजी ने भृगु के पुत्र शुक्र को जगत् के कल्याण के लिए नियुक्त किया, तब महर्षि भृगु ने एक और अबोध पुत्र को जन्म दिया ॥44॥
 
When Lord Brahma appointed Bhrigu's son Shukra for the welfare of the world, then Maharishi Bhrigu gave birth to another innocent son. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)