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mahabharat 1.66.41: इन सबका जप करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है। ब्रह्माजी का हृदय भेदकर भगवान भृगु प्रकट हुए ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 1.66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 66: महर्षियों तथा कश्यप-पत्नियोंकी संतान-परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.66.41 
यान् कीर्तयित्वा मनुज: सर्वपापै: प्रमुच्यते।
ब्रह्मणो हृदयं भित्त्वा नि:सृतो भगवान् भृगु:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इन सबका जप करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है। ब्रह्माजी का हृदय भेदकर भगवान भृगु प्रकट हुए ॥41॥
 
By chanting all these, man becomes free from all sins. Lord Bhrigu appeared after piercing the heart of Brahmaji. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)